काली कोयल, काला कौवा—दोनों का रंग एक है,फिर भी एक की वाणी सम्मान पाती हैऔर दूसरे की आवाज़ को हम कर्कश कहकर भुला देते हैं।मंद-मंद बहती हुई हवा,ठंडी-सी शाम,इन पहाड़ों पर तैरते हुए बादलऔर उनके बीच आती-जाती धूप—जब प्रकृति अपनी ही धुन में लुका-छिपी खेल रही होती है,तब जाने क्यों मुझे लगता है—कौवा भी काला है,कोयल भी काली है।फिर दोनों के हिस्से में इतना अंतर क्यों?एक को हम सुनना चाहते हैं,दूसरे को देखते ही दूर भगा देते हैं।

प्रकृति का खेल भी देखिए—कोयल अपने अंडे कौवे के घोंसले में छोड़ जाती है।कौवा उन्हें अपना समझकर सेता है,उनकी रक्षा करता है,उन्हें पालता है।और जब कोयल का बच्चा बड़ा होता है,तो वह उसी घोंसले में पले दूसरे बच्चों को पीछे छोड़ देता है।कितना विचित्र है!जिसे हम उसकी मधुर आवाज़ के कारणअपने पास बैठाते हैं,ज़रूरी नहीं कि वही हमारे लिए शुभ हो।और जिसे हम उसकी कर्कश आवाज़ के कारणअपने से दूर कर देते हैं,ज़रूरी नहीं कि वह हमारा अहित चाहता हो।कभी-कभी कठोर शब्दों के पीछेसबसे गहरी संवेदना छिपी होती है।कुछ लोग सीधे बोलते हैं।वे आपकी गलतियों पर पर्दा नहीं डालते।आपके काम में कमी हो तो बताते हैं।आप रास्ते से भटकें तो रोकते हैं।उनकी बात शायद अच्छी न लगे,लेकिन उनके शब्दों के पीछेआपको बचाने की नीयत हो सकती है।हम ऐसे लोगों को अक्सर अपने से दूर कर देते हैं—क्योंकि वे हमें वह नहीं बतातेजो हम सुनना चाहते हैं।इसके विपरीत,कुछ लोग इतने मधुर बोलते हैंकि उनकी बातों में हमें कोई खतरा दिखाई ही नहीं देता।वे हमारी हर बात पर मुस्कुराते हैं,हर निर्णय पर सहमति जताते हैं,हमारी कमियों को भी प्रशंसा में बदल देते हैं।और हम उन्हें अपना समझ लेते हैं।यहीं शायद सबसे बड़ा भ्रम पैदा होता है।मधुर वाणी हमेशा सच्चाई की निशानी नहीं होती,और कर्कश वाणी हमेशा शत्रुता की निशानी नहीं होती।जीवन में कभी-कभीवह व्यक्ति अधिक मूल्यवान होता हैजो आपको आपकी गलती बता दे,उस व्यक्ति के बजायजो आपकी गलती पर भी ताली बजाता रहे।कौवा काला है,कोयल भी काली है।अंतर केवल आवाज़ का है।लेकिन मनुष्य का जीवन हमें यह सिखाता है किआवाज़ सुनकर व्यक्ति का मूल्य तय करनाकभी-कभी बहुत महँगा पड़ सकता है।इसलिए अगली बारजब कोई आपकी प्रशंसा बहुत मधुरता से करे,और कोई दूसरा आपकी गलतीथोड़ी कठोरता से बताए—तो दोनों को तुरंत स्वीकार या अस्वीकार मत कीजिए।एक क्षण ठहरिए।शब्दों के पीछे छिपी नीयत को देखिए।क्योंकि संभव है—जिसकी आवाज़ आपको कोयल जैसी मधुर लग रही है,वही आपके घोंसले को भीतर से खाली कर रही हो।और जिसे आप कौवे की तरह कर्कश समझ रहे हैं,वही शायद आख़िरी व्यक्ति होजो आपके घोंसले की रक्षा करना चाहता है।
लेखकीय टिप्पणी: इस लेख का मूल विचार एवं भाव लेखक के स्वयं के हैं; भाषा, प्रवाह और प्रस्तुति को बेहतर बनाने में AI की सहायता ली गई है।
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